ग़ज़ल: मेरा गुरूर बेटी

मेरा गुरूर बेटी
मेरा सुरूर बेटी।
रोशन जहान मेरा
है मेरा नूर बेटी।
हर एक घर में साहब
हो इक जरूर बेटी।
बेटी है मेरा साहिब
मेरा हुजूर बेटी।
आंचल में मेरे आई
बनकर के हूर बेटी।
- अनिल गोयल


महिलाओं के हक़ में उठते हाथ "बिटिया" भी साथ