4. ‘बिटिया’’ कवि सम्मेलन का आयोजन - 25 मार्च 2012

25 मार्च 2012 को ’’बिटिया’’ द्वारा भोपाल में एक अनूठे कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। समन्वय भवन स्थित आॅडिटोरियम में आयोजित यह कवि सम्मेलन इसलिए विशेष और विलक्षण था क्योंकि इसमें शामिल सारे कवि-शायरों ने सिर्फ बेटियों पर केन्द्रित रचनाओं का पाठ किया।
’’घर - घर में रौनकों सी दिखने लगी है ’’बिटिया’’ । 
बिटिया की फिक्र जब से करने लगी है, ’’बिटिया’’ ।। 
इन शब्दों के साथ जब ’’बिटिया’’ द्वारा ’’बेटियों’’ के हक में किये जा रहे प्रयासों को रेखांकित करते हुए काव्यात्मक आगाज़ हुआ, तो विषय के अनेक पहलुओं पर साहित्य सरिता प्रवाहित हो चली । नन्ही कवियत्री कु. यशस्वी ’’कुमुद’’ ने बुंदेली आल्हा की तर्ज पर आधारित अपनी कविता में घर में बेटी के महत्व को दर्शाया -
’’जा घर में बिटिया न होवे, वा घर बिल्कुल सूनईसान’’ 
ग्वालियर की कवियत्री कुंदा जोगलेकर ने अजन्मी बेटी का अपनी मां को संबोधित मार्मिक आख्यान सुनाकर श्रोताओं की पलकें भिगा दी। युवा शायर बद्रवास्ती की नज़्म ’’हम समझ गये वह बिटिया है’’ ने बेटी के वजूद के आयामों से अवगत कराया। कवियत्री डाॅ. ममता तिवारी ने अपनी आधुनिक शैली की कविता के माध्यम से नारी अस्तित्व की समग्रता की बात कही। प्रसिद्व शायर साजि़द रिजवी ने स्वयं की एक ही संतान और वो भी बिटिया होने पर अल्लाह के प्रति कुछ इस तरह शुक्रिया कहा - 
’’शुक्र अल्लाह का जिसने मुझे बेटी दी है, 
ऐसा भी सबके मुकद्दर में कहाँ होता है’’।
ग्वालियर से पधारे हिंदी गजल के वरिष्ठ शायर ज़हीर कुरैशी ने ’’बिटिया’’ संस्था की कोशिशों को इन शब्दों में प्रतिबिम्बित किया - 
’’भ्रूण हत्या के विचारों को हटाने निकले, 
कोख में पल रही बेटी को बचाने निकले’’। 
देश की राजधानी दिल्ली से कार्यक्रम में आये शायर हसन फतेहपुरी ने स्त्री-विमर्श पर आधारित रचनाएं सुनाई। जबलपुर से आये साज़ जबलपुरी ने अपनी नज़म में बतलाया कि किस प्रकार घर के बटवारे के समय सभी को संपत्ति की परवाह थी लेकिन बिटिया को सिर्फ बुजुर्ग दादाजी की लाठी की चिंता थी। कवि कुमार सुरेश ने पिता और बेटी पर आधारित कविता का पाठ किया, वहीं गीतकार शिव कुमार ’अर्चन’ ने बेटियों पर आधारित छंद प्रस्तुत किये। शुजालपुर से पधारे दर्द शुजालपुरी ने जब सस्वर मुक्तक सुनाया तो श्रोता साथ में गाने लगे -
’’वो आरोह भी, वो अवरोह भी, 
परण भी ताल भी स्वर भी, 
वो वीणा है, पखावज भी है 
शहनाई मेरी बिटिया’’
युवा कवि आशीष चैबे ने कहा - 
’’हर युग का कल है बेटी, 
मुश्किल का हल है बेटी’’। 
इस सफल कवि सम्मेलन की अध्यक्षता साहित्य अकादमी, सम्मान से पुरस्कृत वरिष्ठ साहित्कार एवं बिटिया संस्था के अध्यक्ष श्री राजेश जोशी ने की।

 


महिलाओं के हक़ में उठते हाथ "बिटिया" भी साथ