कविता: ये बेटियाँ... ये बेटियाँ...

ये बेटियाँ...ये बेटियाँ
हमारी प्यारी बेटियाँ...
सृष्टि का आधार हैं
प्यार की पुकार हैं
कुदरती श्रृंगार हैं
हमारी प्यारी बेटियाँ...
शांतिप्रिय बेटियाँ
मेहनतकश बेटियाँ
सृजनशील बेटियाँ
साहसी वीर बेटियाँ
हमारी प्यारी बेटियाँ...
प्यार से पलेंगी तो,
बढ़ेंगी, फिर चलेंगी, खूब पढेंगी
कुछ नया गढ़ेंगी अपनी बेटियाँ
हमारी प्यारी बेटियाँ...
अडेंगी सच की शान के लिए
लड़ेंगी जन के मान के लिए
मिटेंगी शांति-न्याय के लिए
जिएँगी मनुज समाज के लिए ...
ये चल पड़ें, तो आसमां
चल पड़ेगा साथ साथ...
ये गा उठें, तो महफिलें
गा उठेंगी साथ साथ....
ये हंसे तो, वादियाँ
हंस पड़ेगी साथ साथ ...
इन्हें ज्ञान का श्रृंगार दो
अक्षर के हथियार दो
स्वतंत्रता और न्याय दो
समता का अहसास दो
अवसर व विश्वास दो
स्नेह और सम्मान दो...
ना यकीनी के इस दौर में
यकीन की शमा बनेंगी बेटियाँ
हमलों की इस होड़ में
बेज़बानों की ज़बां बनेंगी बेटियाँ
अंधियारी स्याह रातों में
दिया बनेंगी बेटियाँ
हमारी प्यारी बेटियाँ...
- मणिमाला


महिलाओं के हक़ में उठते हाथ "बिटिया" भी साथ