कविता: मम्मी-पापा

मम्मी-पापा
मैं जब
बिंदु के बराबर भी
अस्तित्व में आई
तो वह
तुम्हारे प्यार के ही कारण न
प्यार ही के कारण
तुम दोनांे एक हो गए थे
मुझे बताओ तब तुम
अपने प्यार के अबोध पुष्प के प्रति ही
हिंसक
कैसे हो जाते हो
मम्मी-पापा
तुम्हारा वह रसायन कैसे अस्तित्व में
आया
जिससे ‘लव’ और ‘वायलेन्स’
एक हो जाते हैं।
- मनोज श्रीवास्तव


महिलाओं के हक़ में उठते हाथ "बिटिया" भी साथ