कविता: देखो मेरी बेटी का चेहरा

देखो मेरी बेटी का चेहरा
किसी पवित्र ग्रन्थ से भी पवित्र
उसके कदमों से धरती की बरकत
हवायें गुनगुनाएँगी अब
पंछियों के गुमशुदा गीत
और पूछेगी सबसे
बेटी वाले घरों का पता
- डाॅ. वीणा सिन्हा


महिलाओं के हक़ में उठते हाथ "बिटिया" भी साथ